१०.१३ – आहुस्त्वामृषयः सर्वे

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

अध्याय १०

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श्लोक

आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा।
असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥

पद पदार्थ

सर्वे ऋषय: – सभी ऋषियों
तथा – उस प्रकार से
देवर्षि: नारद: – नारद जो दिव्य ऋषि हैं
असित: – ऋषि असित
देवल: – ऋषि देवल
व्यासः – ऋषि व्यास
त्वां – तुम
आहु: – कह रहे हैं
स्वयं चैव – और आप
मे – मुझको
ब्रवीषि – घोषित कर रहे हो (इस तरीके से)

सरल अनुवाद

सभी ऋषियों, नारद जो दिव्य ऋषि हैं, ऋषि असित, ऋषि देवल, ऋषि व्यास और तुम, इस तरीके से कह रहे हैं [ जैसे पहले श्लोक में समझाया गया है ] और अब तुम मुझको वही घोषित कर रहे हो |

अडियेन् जानकी रामानुज दासी

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