४.२४.५ – दैवम् एवापरे यज्ञम्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

अध्याय ४

<< अध्याय ४ श्लोक २४

श्लोक

दैवमेवापरे यज्ञं  योगिनः पर्युपासते ।

पद पदार्थ

अपरे योगिन: – कुछ अन्य कर्म योगी
दैवम् – देवताओं की पूजा करना
यज्ञं एव – केवल यज्ञ 
पर्युपासते – विशेष रूप से लगे हुए हैं

सरल अनुवाद

कुछ अन्य कर्म योगी विशेष रूप से केवल यज्ञ के माध्यम से देवताओं की पूजा करने में लगे हुए हैं।

अडियेन् कण्णम्माळ् रामनुजदासी

>> अध्याय ४ श्लोक २५

आधार – http://githa.koyil.org/index.php/4-24.5

संगृहीत – http://githa.koyil.org

प्रमेय (लक्ष्य) – http://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – http://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – http://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – http://pillai.koyil.org