१.१२ – तस्य सञ्जनयन्

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

अध्याय १

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श्लोक

तस्य सञ्जनयन् हर्षं कुरुवृद्ध: पितामहः ।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥

पद पदार्थ

प्रतापवान्– जो अत्यंत वीर हो
कुरुवृद्धः- कुरु वंश के सर्वश्रेष्ठ वंशज
पितामह:- पितामह भीष्म
तस्य – दुर्योधन को 
हर्षं – आनंद
सञ्जनयन् – लाने के लिए
उच्चै :- उच्च स्वर में 
सिंहनाध्म विनध्य – सिंह की तरह दहाड़ना 
शङ्खं – शंख
दध्मौ  – बजाया 

सरल अनुवाद

महापराक्रमी और कुरु वंश के सर्वश्रेष्ठ वंशज, पितामह भीष्म , दुर्योधन को आनंद लाने के लिए सिंह के समान दहाड़ते हुए उच्च स्वर में अपना शंख बजाया |

>>अध्याय १ श्लोक १.१३

अडियेन् कण्णम्माळ् रामानुजदासि

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