१.२५ – भीष्म-द्रोण-प्रमुखतः

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय १ << अध्याय १ श्लोक २४ श्लोक भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्‌ ।उवाच पार्थ पश्यैतान्‌ समवेतान्‌ कुरूनिति ৷৷ पद पदार्थ भीष्मद्रोणप्रमुखतः – भीष्म और द्रोण के सामनेसर्वेषां महीक्षिताम्‌ च (प्रमुखतः) – सभी राजाओं के सामनेपार्थ – हे पृथा के पुत्र( कुन्तीपुत्र )!समवेतान्‌ – इकट्ठे हुएएतां कुरून … Read more

श्री भगवद्गीता – प्रस्तावना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री भगवद्गीता महाभारत का सबसे अनिवार्य अंग है | जब अधार्मिक एवं बुरी ताकतों के कारण धरती माँ का भोज बढ़ता गया तो श्रीमन नारायण, द्वापर युग के अंतिम समय में श्री कृष्ण का अवतार लिए | श्री कृष्ण परमात्मा ने खुद कहा है , अवतार … Read more