११.५ – पश्य मे पार्थ रूपाणि
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ११ << अध्याय ११ श्लोक ४ श्लोक श्री भगवान उवाच पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रश : | नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णा कृतीनि च || पद पदार्थ श्री भगवान उवाच – भगवान कृष्ण ने कहापार्थ – हे कुन्तीपुत्र!मे – मेरा रूपाणी – रूपों (जो हर जगह उपस्थित … Read more