८.४ – अधिभूतं क्षरो भावः

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ८ << अध्याय ८ श्लोक ३ श्लोक अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् ।अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥ पद पदार्थ देहभृतां वर – हे देहधारियों में श्रेष्ट !अधिभूतं – ऐश्वर्यार्थी ( जो लोग सांसारिक धन की इच्छा रखते हैं ) के लिए अधिभूतंक्षर: भावः – ( श्रेष्ट … Read more

८.३ – अक्षरं ब्रह्म परमम्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ८ << अध्याय ८ श्लोक २ श्लोक श्रीभगवान उवाचअक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते।भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञित: ॥ पद पदार्थ श्री भगवान उवाच – श्री कृष्ण ने कहाब्रह्म – ब्रह्म हैपरमम् अक्षरं – वो आत्मा जो पदार्थ के किसी भी संबंध से मुक्त हो जाता हैअध्यात्मं – अध्यात्मं … Read more

८.२ – अधियज्ञः कथं कोऽत्र

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ८ << अध्याय ८ श्लोक १ श्लोक अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन ।प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ पद पदार्थ मधुसूदन – जिसने मधु नाम राक्षस को मारा !अत्र अस्मिन् देहे – इंद्र इत्यादि में , जो शास्त्र में आपके शरीर के रूप में जाने जाते … Read more

८.१ – किं तद् ब्रह्म किम् अध्यात्मम्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ८ << अध्याय ७ श्लोक ३० श्लोक अर्जुन उवाचकिं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ।अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ पद पदार्थ अर्जुन उवाच – अर्जुन ने कहापुरुषोत्तम – हे पुरुषोत्तम !तद् ब्रह्म किं – ब्रह्म किसे कहते हैं ?अध्यात्मं किं – अध्यात्मं किसे कहते … Read more

अध्याय ८ – अक्षर परब्रह्म योग (या) परिवर्तनहीन् परब्रह्म का मार्ग

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः << अध्याय ७ भगवद् रामानुज आळवार् तिरुनगरी में , श्रीपेरुम्बुदूर् में , श्रीरंगम् में और तिरुनारायणपुरम् में >> अध्याय ९ आधार – http://githa.koyil.org/index.php/8/ संगृहीत – http://githa.koyil.org प्रमेय (लक्ष्य) – http://koyil.orgप्रमाण (शास्त्र) – http://granthams.koyil.orgप्रमाता (आचार्य) – http://acharyas.koyil.orgश्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – http://pillai.koyil.org

ஸ்ரீ பகவத் கீதை ஸாரம் – அத்யாயம் 8 (அக்ஷர பரப்ரஹ்ம யோகம்)

ஸ்ரீ:  ஸ்ரீமதே சடகோபாய நம:  ஸ்ரீமதே ராமாநுஜாய நம:  ஸ்ரீமத் வரவரமுநயே நம: ஸ்ரீ பகவத் கீதை ஸாரம் << அத்யாயம் 7 கீதார்த்த ஸங்க்ரஹம் பன்னிரண்டாம் ச்லோகத்தில், ஆளவந்தார் எட்டாம் அத்யாயத்தின் கருத்தை, “எட்டாவது அத்தியாயத்தில், இவ்வுலகச் செல்வத்தை விரும்பும் ஐச்வர்யார்த்தி, இங்கிருக்கும் சரீரத்திலிருந்து முற்றிலும் விடுபட்ட பிறகு தன் ஆத்மாவையே அனுபவிக்க விரும்பும் கைவல்யார்த்தி மற்றும் பகவானின் திருவடித் தாமரைகளை அடைய விரும்பும் ஞானி என்று மூன்று விதமான பக்தர்களால் அறிந்து கொண்டு அனுஷ்டானத்தில் … Read more

Essence of SrI bhagavath gIthA – Chapter 8 (akshara parabrahma yOga)

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Essence of SrI bhagavath gIthA << Chapter 7 In the twelfth SlOkam of gIthArtha sangraham, ALavandhAr explains the summary of eighth chapter saying “ In the eighth chapter, the different types of principles which are to be understood and practiced by the three types of … Read more

8.28 vEdhEshu yagyEshu thapa:su chaiva

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Chapter 8 << Chapter 8 verse 27 SlOkam – Original vEdhEshu yagyEshu thapassu chaiva dhAnEshu yath puNyapalam pradhishtam | athyEthi thath sarvam idham vidhithvA yOgI param sthAnam upaithi chAdhyam || word-by-word meaning vEdhEshu – to recite vEdhas yagyEshu – yagyas (sacrifices) thapassu cha – and … Read more

8.28 vedeṣu yajñeṣu tapaḥsu caiva (Original)

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Chapter 8 << Chapter 8 verses 27 Simple vedeṣu yajñeṣu tapaḥsu caiva dāneṣu yat puṇya-phalaṁ pradiṣṭam atyeti tat sarvam idaṁ viditvā yogī paraṁ sthānam upaiti cādyam ‘Whatever fruit is declared for Vedas, Sacrifices, Austerities and Gifts, the yogi transcends all by knowing this; and reaches … Read more

8.27 naithE sruthI pArtha jAnan

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama: Chapter 8 << Chapter 8 verses 26 SlOkam – Original naithE sruthI pArtha jAnan yOgI muhyathi kaSchana | thasmAth sarvEshu kAlEshu yOgayukthO bhavArjuna || word-by-word meaning pArtha arjuna – Oh arjuna, son of kunthI! EthE sruthI – These two paths, archirAdhi and dhUmAdhi jAnan – … Read more