१.२२ – यावद् एतान् निरीक्षेSहं

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

अध्याय १

< < अध्याय १  श्लोक २१

श्लोक

यावद् एतान् निरीक्षेSहं  योद्धुकामानवस्थितान् ।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥

पद पदार्थ 

योद्धुकामान् – युद्ध लड़ने की इच्छा से 
अवस्थितान् – जो  सामने खड़े हैं 
एतान् – ये दुर्योधन और अन्य
यावद् निरिक्षे – जिन्हें मैं देख सकता हूँ
अस्मिन रणसमुद्यमे – इस युद्ध के प्रयास में
मया – मेरे द्वारा
कै: सह योद्धाम् – जिनसे मुझे युद्ध करना है
यावद् निरीक्षे – जहाँ तक मैं देख सकूँ (रथ को ऐसे स्थान पर खड़ा करो)

सरल अनुवाद

युद्ध करने के इच्छुक सामने खड़े दुर्योधन आदि , जिन्हे मैं  देख रहा हूँ, और  इस युद्ध के प्रयास में मेरे द्वारा  जिनसे मुझे युद्ध करना है, (उन्हें) जहाँ तक मैं देख सकूँ (रथ को ऐसे स्थान पर खड़ा करो) |

>>अध्याय १ श्लोक १.२3

अडियेन् कण्णम्माळ् रामानुज दासि

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