३.३७ – काम एष क्रोध एष
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ३ << अध्याय ३ श्लोक ३६ श्लोक श्रीभगवानुवाच काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः ।महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥ पद पदार्थ श्री भगवान उवाच – भगवान श्री कृष्ण ने उत्तर दियाएष: – वह कारण जिसके बारे में तुमने प्रश्न किया ( लौकिक सुख )रजोगुण समुद्भवः – रजो … Read more