९.२३ – ये त्वन्यदेवताभक्ता
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ९ << अध्याय ९ श्लोक २२ श्लोक ये त्वन्यदेवताभक्ता यजन्ते श्रद्धयाऽन्विता: |तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम् || पद पदार्थ कौन्तेय – हे कुंतीपुत्र !ये तु – जो लोगअन्य देवता भक्ता – अन्य देवताओं ( जैसे इंद्र , रुद्र, ब्रह्मा इत्यादि ) के प्रति श्रद्धा रखते हैंश्रद्धया … Read more