८.२३ – यत्र काले त्वनावृत्तिम्
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः अध्याय ८ << अध्याय ८ श्लोक २२ श्लोक यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिन: | प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ || पद पदार्थ भरतर्षभ! – हे भरत वंश के वंशज!यत्र काले प्रयाता: योगिन: तु – योगी जो विभिन्न साधन अपनाते हैंआवृत्तिं अनावृत्तिं च – संसार मंडल [भौतिक … Read more